हिंदी कविता में अरसे तक संदिग्ध और लांछित रहा प्रेम बाबुषा की कविताओं में एक उदात्त और विलक्षण अनुभव की तरह आता है- वह देह की मिट्टी में सना, आत्मा के जल से सिंचा, सभ्यता-यात्रा की आग में सिंका और संस्कृति के कई अवयवों को समेटता एक अलग संसार बनाता है, जिसमें एक आध्यात्मिक आभा भी दिखती है और एक दुनियावी रोशनी भी।
Book 1: सत्य मधुमक्खी का छत्ता है
Book 2: लौ
Book 3: उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
Book 4: भाप के घर में शीशे की लड़की (2nd Edition)
Author: Baabusha Kohli / बाबुषा कोहली
ISBN: 978-81-943123-7-6, 978-81-943123-2-1, 978-81-952549-2-7, 978-81-952549-0-3
Cover Type: Paperback
Language: Hindi
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