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आग और पानी (6th Edition) – Prebook
₹300.00Author: व्योमेश शुक्ल
Cover Type: Paperback
ISBN: 978-81-952549-3-4
Language: Hindi -
Khushiyon ke Guptchar / ख़ुशियों के गुप्तचर (5th Edition)
₹300.00Book Name: Khushiyon ke Guptchar / ख़ुशियों के गुप्तचर
Author: Geet Chaturvedi / गीत चतुर्वेदी
ISBN: 978-8194312307
Edition: 5th Edition
Language: Hindi
Cover Type: Paperback -
Adhuri Cheezon Ka Devta / अधूरी चीज़ों का देवता (3rd Edition)
₹300.00Book Name: Adhuri Cheezon Ka Devta / अधूरी चीज़ों का देवता
Author: Geet Chaturvedi / गीत चतुर्वेदी
ISBN: 978-8194312314
Edition: 3rd Edition -
Bhaap Ke Ghar Mein Sheeshe Ki Ladki / भाप के घर में शीशे की लड़की (2nd Edition)
₹260.00Book Name: Bhaap Ke Ghar Mein Sheeshe Ki Ladki / भाप के घर में शीशे की लड़की
Author: Baabusha Kohli / बाबुषा कोहली
ISBN: 978-81-952549-0-3
Edition: 2nd -
गार्जियनता
₹220.00गार्जियनता का गद्य स्मृति के इकहरे संचय से नहीं, जीवन की रगड़घस से संभव हुआ है। माँ-पिता, वृहत्तर परिवार और पड़ोस ही नहीं, स्थानीयता—जो विरल ढंग से सार्वदेशिकता भी संभव करती है—उसके संघर्ष और सौंदर्य की अद्भुत समाई है इस हँसमुख-गद्य में। यह अच्छा गद्य लिखने के संकल्प से भरा हुआ गद्य है। इसलिए इसे गद्य लिखने की एक मास्टरक्लास कहना अतिशयोक्ति नहीं। — अनुराग वत्स
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दुःख की दुनिया भीतर है
₹240.00मैं जब होशमंद हुआ, तब जाना कि पिता गुम्मा आदमी हैं। लेकिन माँ बताती है कि पहले वह ऐसे नहीं थे। मेरे बाल मन पर भी पिता की भिन्न छवियाँ दर्ज हैं —मज़दूरों के हक़ में खड़े रहने वाले, रिश्तेदारों के घर होने वाली शादियों में काम करने वाले, तोते, खरगोश और बकरियों में रुचि लेते, बाज़ार से भाजी के झोले उठा कर लाते, बैठक में खैनी बनाते और नहीं तो किसी को पीटते पिता! ऐसे आदमी के लिए बाद में चुप होते जाना और अपनी काया में सिमट कर जीना दुष्कर रहा होगा। — इसी पुस्तक से।
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Aakash Mein Ardhchandra / आकाश में अर्द्धचन्द्र
₹220.00Book Name: Aakash Mein Ardhchandra / आकाश में अर्द्धचन्द्र
Author: Pankaj Chaturvedi / पंकज चतुर्वेदी
ISBN: 978-81-952549-6-5 -
तुका आकाश जितना (संत तुकाराम की कविताएँ)
₹220.00Author: राजेंद्र धोड़पकर
Cover Type: Paperback
ISBN: 978-81-943123-5-2
Language : Hindi -
सत्य मधुमक्खी का छत्ता है
₹250.00किताब के बारे में : वास्तव में कविता मैं उसी बल के कारण लिखती हूँ, जिसके चलते धरती पर मेघ बरसते हैं या पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। कविता मैं उसी विधान के तहत लिखती हूँ, जिसके चलते दिन-रात घटित होते हैं और ऋतुएँ अस्तित्व में आती हैं। अंतोनियो पोर्किया का कथन है कि मैं कविताओं तक नहीं जाता, कविताएँ मुझ तक आती हैं। पोर्किया के आत्म से अनुमति ले इस मूल्यवान कथन के नीचे मैं भी हस्ताक्षर करना चाहती हूँ।
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तुम हो कि मुक़द्दमा लिखा देती हो
₹260.00तुम हो कि मुक़द्दमा लिखा देती हो
एक ऐसे समय में जब यह मान लिया गया हो कि कविता या सरल-मति में साहित्य ही, हमारे समय के संघर्षों में हमारा बहुत साथ देने लायक नहीं रहा है—हालाँकि उससे कमतर-बदतर चीजों और लोगों से हम आस लगाये बैठे हैं—‘बूथ पर लड़ना’ सरीखी कविताएं बोध, विचार, विवेक और अनिर्णय की हमारी दुविधाजनक स्थिति को बदलती है। वह अपने भीतर जिस अन्यथा विवादास्पद तथ्य को अपना आत्म-सत्य स्वीकार कर आगे बढ़ती है, और उसके जितने आयामों को उद्घाटित करने में सफल हुई है, उसकी अपेक्षा हम हर अच्छी कविता से करते हैं—जो असल में बहुत कम मौक़ों पर पूरी होती दिखती है। इस लिहाज़ से वह इधर लिखी जा रही कविताओं में अपने तरह की अकेली है। हालाँकि बूथ जैसी सबसे छोटी इकाई पर भी प्रतिबद्ध होकर लड़नेवाले इस कवि में इस बात का भी बहुत तीखा एहसास है कि ‘बहुत सारे संघर्ष स्थानीय रह जाते हैं’!
संख्या में बहुत अधिक कविताएँ न लिखने के बावजूद व्योमेश शुक्ल हिन्दी कविता के मानचित्र पर लगातार लक्षित किए जाते रहे हैं। इसकी वजह अपनी काव्य-भाषा, शिल्प और कहन में हासिल उनका वह नैरन्तर्य है, जिसे बहुतेरे कवि आरंभिक उठान के बाद दूर तक संभाल पाने में अक्षम साबित हुए हैं।
दिलचस्प यह है कि कविता और वैचारिक गद्य के लिए वह लगभग एक जैसी भाषा का इस्तेमाल करते दिखते हैं और उसके प्रति बहुमुखी सजगता बरतते हैं। इसका उज्ज्वल प्रमाण है बनारस पर एकाग्र उनकी गद्य-पुस्तक ‘आग और पानी’, जिसे पढ़ते हुए एक लम्बी कविता का ही एहसास बना रहता है।
रुख़ पब्लिकेशन्स से अब पढ़िए व्योमेश शुक्ल की सभी कविताएँ एक ज़िल्द में : ‘तुम हो कि मुक़द्दमा लिखा देती हो’।
कवि ने हमारा आग्रह मान कर इस विशेष संग्रह के लिए 2006 से लेकर अब तक लिखी गई सभी कविताओं का पुनर्संयोजन किया है। अपनी कविता से बीज-शब्द नबेरे हैं। उसके आधार पर ही अलग-अलग खण्ड की निर्मिति हुई है और सबसे अहम् : अपनी कविताओं पर उन्होंने एक सुचिंतित वक्तव्य दिया है, जिसे पुस्तक में ‘हलफ़नामा’ शीर्षक से पढ़ा जा सकता है।
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उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
₹220.00हिंदी कविता में अरसे तक संदिग्ध और लांछित रहा प्रेम बाबुषा की कविताओं में एक उदात्त और विलक्षण अनुभव की तरह आता है- वह देह की मिट्टी में सना, आत्मा के जल से सिंचा, सभ्यता-यात्रा की आग में सिंका और संस्कृति के कई अवयवों को समेटता एक अलग संसार बनाता है, जिसमें एक आध्यात्मिक आभा भी दिखती है और एक दुनियावी रोशनी भी।
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अधूरी चीज़ों का देवता + ख़ुशियों के गुप्तचर
₹600.00Book 1: Adhuri Cheezon Ka Devta / अधूरी चीज़ों का देवता
Author: Geet Chaturvedi / गीत चतुर्वेदी
ISBN: 978-8194312314Book 2: Khushiyon ke Guptchar / ख़ुशियों के गुप्तचर
Author: Geet Chaturvedi / गीत चतुर्वेदी
ISBN: 978-8194312307 -
4 Books Combo (सत्य मधुमक्खी का छत्ता है + लौ + उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है + भाप के घर में शीशे की लड़की)
₹1,130.00Book 1: सत्य मधुमक्खी का छत्ता है
Book 2: लौ
Book 3: उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
Book 4: भाप के घर में शीशे की लड़की (2nd Edition)
Author: Baabusha Kohli / बाबुषा कोहली
ISBN: 978-81-943123-7-6, 978-81-943123-2-1, 978-81-952549-2-7, 978-81-952549-0-3
Cover Type: Paperback
Language: Hindi -
Books Combo Pack (13 Books)
₹2,829.00Book 1: दुःख की दुनिया भीतर है
Book 2: लौ
Book 3: तुका आकाश जितना (संत तुकाराम की कविताएँ)
Book 4: गार्जियनता
Book 5: तुम हो कि मुक़द्दमा लिखा देती हो
Book 6: आग और पानी
Book 7: उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
Book 8: ख़ुशियों के गुप्तचर
Book 9: आकाश में अर्द्धचन्द्र
Book 10: अधूरी चीज़ों का देवता
Book 11: भाप के घर में शीशे की लड़की
Book 12: उम्मीद प्रेम का अन्न है
Book 13: सत्य मधुमक्खी का छत्ता है





















