1 review for Aakash Mein Ardhchandra / आकाश में अर्द्धचन्द्र
5 out of 5
Navneet Kaur –
आजकल जो देश के हालात हैं, उनके बारे में पंकज चतुर्वेदी ने ‘आकाश में अर्द्धचन्द्र’ में जो लिखा है, वो लाजवाब है… मुझे पढ़कर अच्छा लगा और साथ ही यह महसूस भी हुआ कि इनसान चाहे पंजाब का हो या उत्तर प्रदेश का, जिसे आँखों से दिखता है और जो सच कहने और क़बूलने का दम रखता है, वह इनसान सही मायने में अपने आप में जाग्रत है और मेरे ख़याल से उसे अनुभूति है कि अंधभक्ति का दौर इस वक़्त अपने प्रचंड रूप में है… और यह भी मानती हूँ कि बहुत तरस के योग्य हैं वे लोग, जिनकी आँखें खुली हैं, पर आत्मा अंधी है…।
उनकी किताब पढ़कर मुझे बहुत ही गर्व महसूस हुआ और ख़ुशी हुई कि अभी भी जीते जी कुछ लोगों की आत्मा मरी नहीं है…।
हिंदी कविता में अरसे तक संदिग्ध और लांछित रहा प्रेम बाबुषा की कविताओं में एक उदात्त और विलक्षण अनुभव की तरह आता है- वह देह की मिट्टी में सना, आत्मा के जल से सिंचा, सभ्यता-यात्रा की आग में सिंका और संस्कृति के कई अवयवों को समेटता एक अलग संसार बनाता है, जिसमें एक आध्यात्मिक आभा भी दिखती है और एक दुनियावी रोशनी भी।
Book 1: सत्य मधुमक्खी का छत्ता है
Book 2: लौ
Book 3: उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
Book 4: भाप के घर में शीशे की लड़की (2nd Edition)
Author: Baabusha Kohli / बाबुषा कोहली
ISBN: 978-81-943123-7-6, 978-81-943123-2-1, 978-81-952549-2-7, 978-81-952549-0-3
Cover Type: Paperback
Language: Hindi
Navneet Kaur –
आजकल जो देश के हालात हैं, उनके बारे में पंकज चतुर्वेदी ने ‘आकाश में अर्द्धचन्द्र’ में जो लिखा है, वो लाजवाब है… मुझे पढ़कर अच्छा लगा और साथ ही यह महसूस भी हुआ कि इनसान चाहे पंजाब का हो या उत्तर प्रदेश का, जिसे आँखों से दिखता है और जो सच कहने और क़बूलने का दम रखता है, वह इनसान सही मायने में अपने आप में जाग्रत है और मेरे ख़याल से उसे अनुभूति है कि अंधभक्ति का दौर इस वक़्त अपने प्रचंड रूप में है… और यह भी मानती हूँ कि बहुत तरस के योग्य हैं वे लोग, जिनकी आँखें खुली हैं, पर आत्मा अंधी है…।
उनकी किताब पढ़कर मुझे बहुत ही गर्व महसूस हुआ और ख़ुशी हुई कि अभी भी जीते जी कुछ लोगों की आत्मा मरी नहीं है…।
पंकज जी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ…।
आभार सहित…
नवनीत कौर