1 review for Aakash Mein Ardhchandra / आकाश में अर्द्धचन्द्र
5 out of 5
Navneet Kaur –
आजकल जो देश के हालात हैं, उनके बारे में पंकज चतुर्वेदी ने ‘आकाश में अर्द्धचन्द्र’ में जो लिखा है, वो लाजवाब है… मुझे पढ़कर अच्छा लगा और साथ ही यह महसूस भी हुआ कि इनसान चाहे पंजाब का हो या उत्तर प्रदेश का, जिसे आँखों से दिखता है और जो सच कहने और क़बूलने का दम रखता है, वह इनसान सही मायने में अपने आप में जाग्रत है और मेरे ख़याल से उसे अनुभूति है कि अंधभक्ति का दौर इस वक़्त अपने प्रचंड रूप में है… और यह भी मानती हूँ कि बहुत तरस के योग्य हैं वे लोग, जिनकी आँखें खुली हैं, पर आत्मा अंधी है…।
उनकी किताब पढ़कर मुझे बहुत ही गर्व महसूस हुआ और ख़ुशी हुई कि अभी भी जीते जी कुछ लोगों की आत्मा मरी नहीं है…।
किताब के बारे में : वास्तव में कविता मैं उसी बल के कारण लिखती हूँ, जिसके चलते धरती पर मेघ बरसते हैं या पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। कविता मैं उसी विधान के तहत लिखती हूँ, जिसके चलते दिन-रात घटित होते हैं और ऋतुएँ अस्तित्व में आती हैं। अंतोनियो पोर्किया का कथन है कि मैं कविताओं तक नहीं जाता, कविताएँ मुझ तक आती हैं। पोर्किया के आत्म से अनुमति ले इस मूल्यवान कथन के नीचे मैं भी हस्ताक्षर करना चाहती हूँ।
Navneet Kaur –
आजकल जो देश के हालात हैं, उनके बारे में पंकज चतुर्वेदी ने ‘आकाश में अर्द्धचन्द्र’ में जो लिखा है, वो लाजवाब है… मुझे पढ़कर अच्छा लगा और साथ ही यह महसूस भी हुआ कि इनसान चाहे पंजाब का हो या उत्तर प्रदेश का, जिसे आँखों से दिखता है और जो सच कहने और क़बूलने का दम रखता है, वह इनसान सही मायने में अपने आप में जाग्रत है और मेरे ख़याल से उसे अनुभूति है कि अंधभक्ति का दौर इस वक़्त अपने प्रचंड रूप में है… और यह भी मानती हूँ कि बहुत तरस के योग्य हैं वे लोग, जिनकी आँखें खुली हैं, पर आत्मा अंधी है…।
उनकी किताब पढ़कर मुझे बहुत ही गर्व महसूस हुआ और ख़ुशी हुई कि अभी भी जीते जी कुछ लोगों की आत्मा मरी नहीं है…।
पंकज जी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ…।
आभार सहित…
नवनीत कौर