मैं जब होशमंद हुआ, तब जाना कि पिता गुम्मा आदमी हैं। लेकिन माँ बताती है कि पहले वह ऐसे नहीं थे। मेरे बाल मन पर भी पिता की भिन्न छवियाँ दर्ज हैं —मज़दूरों के हक़ में खड़े रहने वाले, रिश्तेदारों के घर होने वाली शादियों में काम करने वाले, तोते, खरगोश और बकरियों में रुचि लेते, बाज़ार से भाजी के झोले उठा कर लाते, बैठक में खैनी बनाते और नहीं तो किसी को पीटते पिता! ऐसे आदमी के लिए बाद में चुप होते जाना और अपनी काया में सिमट कर जीना दुष्कर रहा होगा। — इसी पुस्तक से।
Book 1: सत्य मधुमक्खी का छत्ता है
Book 2: लौ
Book 3: उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है
Book 4: भाप के घर में शीशे की लड़की (2nd Edition)
Author: Baabusha Kohli / बाबुषा कोहली
ISBN: 978-81-943123-7-6, 978-81-943123-2-1, 978-81-952549-2-7, 978-81-952549-0-3
Cover Type: Paperback
Language: Hindi
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